તુલસીદલ

સ્વ. મૂળશંકર ત્રિવેદી રચિત અને અન્ય સ્તુતિઓ

ABMOHE AESI AAYA BANI… September 21, 2007

Filed under: અન્ય સ્તુતિઓ — dhavalrajgeera @ 1:26 pm

अब मोहे ऐसी आय बनी,…..
श्री शंखेश्वर पार्श्व जिनेसर, मेरो तुं एक धनी…. अब

तुम बिन कोउ चित्त न सुहावे, आवे कोडी गुनी;
मेरो मन तुम उपर रसियो, अलि जिम कमल भनी….अब
तुम नामे सवि संकट चूरे, नागराज धरनी;
नाम जपुं निशि वासर तेरो, ए शुभ मुज करनी…अब
कोपानल उपजावत दुर्जन , मथन वचन अरनी;
नाम जपुं जलधार तिहां तुज, धारुं दु:ख हरनी…अब
मिथ्यामति बहु जन है जगमें, पद न धरत धरनी;
उनको अब तुज भक्ति प्रभावे, भय नहि एक कनी….अब
सज्ज्न नयन-सुधारस -अंजन, दुरजन रवि भरनी
तुज मुरति नीरखे सो पावे, सुख जस लील धनी…अब

 

 

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