ईश्वर February 8, 2008
ईश्वर
From सर्वज्ञ
ईश प्राप्ति (शांति) के लिए अंतःकरण शुद्ध होना चाहिए |
– रविदास
ईश्वर के हाथ देने के लिए खुले हैं. लेने के लिए तुम्हें प्रयत्न करना होगा |
– गुरु नानक देव
रहिमन बहु भेषज करत ,
ब्याधि न छाडत साथ ।
खग मृग बसत अरोग बन ,
हरि अनाथ के नाथ ॥
अजगर करैं न चाकरी, पंछी करैं न काम।
दास मलूका कहि गये सब के दाता राम।। —– सन्त मलूकदास
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