તુલસીદલ

સ્વ. મૂળશંકર ત્રિવેદી રચિત અને અન્ય સ્તુતિઓ

ईश्वर February 8, 2008

Filed under: પ્રકીર્ણ — dhavalrajgeera @ 1:18 am

ईश्वर

From सर्वज्ञ

ईश प्राप्ति (शांति) के लिए अंतःकरण शुद्ध होना चाहिए |

– रविदास

ईश्वर के हाथ देने के लिए खुले हैं. लेने के लिए तुम्हें प्रयत्न करना होगा |

– गुरु नानक देव

रहिमन बहु भेषज करत ,

ब्याधि न छाडत साथ ।

खग मृग बसत अरोग बन ,

हरि अनाथ के नाथ ॥

अजगर करैं न चाकरी, पंछी करैं न काम।

दास मलूका कहि गये सब के दाता राम।। —– सन्त मलूकदास

http://www.akshargram.com/sarvagya से लिया गया
 

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