यह प्यार करने वाला, कभि यारसे न लडता.
मै आख बन्ध करलु फिरभी मुझे दिखाता,
वो पलभी मौन रखता फिरभी मुझे सुनाता.
वो प्यारा मेरा होके क्यु पास नही आता?
मै मरते दमतक मरता, फीरभी दुरी ही रहता.
वो प्यार ही सदा है जब रब सदा ही बोले,
तुहि हे तुहि हे मेरा तुहि हे तुहि हे मेरा.
तुहि हे तुहि हे मेरा तुहि हे तुहि हे मेरा.
राजेन्द्र त्रिवेदि
मै मरते दमतक मरता, फीरभी दुरी ही रहता.
वो प्यार ही सदा है जब रब सदा ही बोले,
दी हैं जो सोगात प्यार से तुम ने हमे . …
Ullas said in the E Mail:
”
Dear Raju-mama,
Of course ! I agree !
एक मे ही हूँ तेरा, मे ही हूँ तेरा सच्चा चाहने वाला.
बहोत खूब ! आप तो बड़े कवि बन गये हो.
जय रामजी की,
उल्लास आनंद जी
મજાનું કાવ્ય બન્યું છે. મર્મસ્પર્શી.