શારદા સ્તુતી

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મા તું બ્રહ્માજીની બાળ, તારા તેજ તણો નહી પાર,
તુજને વંદુ વારંવાર, માતા સરસ્વતી

તારાં કીરણે કવીજન શોભે, તે મેળવવા મુજ મન લોભે
મા તુજ ચરણકમળમાં થોભે, માતા સરસ્વતી

મધુ રવ તવ વીણાના સાચે, મુજ મન મોર બનીને નાચે
સર્જનશક્તી તુજની યાચે , માતા સરસ્વતી

મુળજી તુજ ભક્તીનો દાસ, લાગી તવ દર્શનની પ્યાસ,
હેતે પુરજે તેની આશ , માતા સરસ્વતી

4 responses »

  1. MOTHER GIVES BIRTH,
    NURTURES THE LIFE.
    WE ALL NEEDS TO SERVE OUR BIOLOGICAL MOTHER.
    MOTHER LAND,
    MOTHER EARTH….. AND “ADYASHAKTI”.
    WHEN SHAKTI AND SHIVA ARE UNITED WE ALL STAY A LIVE.
    THE TIME,THE UNION DEPARTS REMAINS ONLY WHAT IS “SHAV”.
    ONE OF THE MOTHER FORM IS SARASWATI- SHARADA.IN THIS
    BHAJAN READ THE DEVOTION OF OUR FATHER.

  2. आरती मात भवानीकी, जगत जननी मा दुर्गाकी .
    हे जगदंबे मात सरस्वति, महादेवि, अम मात महेश्वरि,
    आद्यशक्ति जय ब्रह्मस्वरूपा गिरिजा मैयाकी ,
    अमृता मात शिवानीकी……… आरती मात भवानीकी…… १
    मातृशक्ति, भगवती भवतारिणी,महाकाली जय तिमिर विदारिणी,
    जगदुध्धारक जय जगदीश्वरि, भवभय भंजनिकी ,
    जयति जय भुवनेश्वरी माकी…आरती मात भवानीकी…… २
    हे वरदायिनी, वरद हस्तीनी, जगजननी देवी करुणामयी,
    भुक्ति मुक्तिदा, ज्ञानप्रदा जय वागेश्वरी माकी ,
    मुदमयी मा मन-मोहिनीकी ……….. आरती मात भवानीकी ….. ३
    सुरमुनि पूजित, गुणीजन वंदित, भक्ति प्रदायक, भवदुःख हारक,
    आह्लादिनी, जय कमल-मालिनी जगद्धात्री माकी,
    चिन्मयी चिती चिदंबरीकी…………आरती मात भवानीकी ….. ४
    हे जननी, साधकपथ दर्शिनी, प्राणप्रदा, मद-मोह विनाशिनी
    शुध्ध बुध्धिदा, विमल भक्तिदा, जन-मन मोहिनीकी,
    जयति जय शिवमनरंजनीकी……………आरती मात भवानीकी…..५
    मंगलकारी, अतुल सुखदायिनी, गौरी, शारदे, मात पार्वती,
    जनमन रंजिनी जय नारायणि, भीड भंजिनी माकी,
    त्र्यंबिका विश्वंभरी माकी………….. आरती मात भवानीकी….. ६
    जय जगवंद्य देवी जगजननि, शुभ्र-सुचारु विमल पथ दर्शिनी
    किरणमालिका आत्मप्रभा अम मुनिमन रंजनिकी,
    जयति जय मंगल मूरतकी ………….. आरती मात भवानीकी,…. ७

  3. From Nirav rave By Praganaben Vyas,

    चितीशक्ति चिदंबरा !!

    स्वहृदि स्थिते देवि ! भवानी भुवनेश्वरि !

    महादेवि ! नमस्तुभ्यम् त्राहि मां परमेश्वरि !!

    शांकरी शक्तिरूपिणी, भैरवी भवतारिणी ,

    जगदंबा चिन्मयी धात्री भुक्ति मुक्ति प्रदायिनी !!

    महाकाली महामाया महासंहारिणी शिवा ,

    चामुण्डा चंडिका चौला जीवनं प्राणिनां प्रभा !!

    आद्यशक्ति जगज्जननी मोहिनी मदमर्दिनी ,

    ब्रह्मरूपा रूपातिता मायाविनी महेश्वरी !!

    अंबिका पार्वती दुर्गा सर्वसाक्षी ऋतंभरा ,

    प्रसीद प्राणदा देवि ! चितीशक्ति चिदंबरा !!

    मेरुरज्जु की जड़ में कुण्डलिन आकार में प्रसुप्त पड़ी, विशाल शक्ति कुंड़लिनी शक्ति सभी योगतंत्रो का आधार है.

    कुंड़लिनी को जागरुक करके सभी योग किए जा सकते है. शक्ति आपके पूरे शरीर में भरी है फिर भी आप उसे जानते नही है.

    चिती जिनका पता ज्ञानियों ड को है, आपको नही पता है. फिर आप अपने को धनवान कैसे कह सकते है.

    यंहा तक कि हरी ओर हरा को भी इसकी आवश्यकता है. ब्रह्मा भी उसकी मदद मांगते है.

    उसकी चमक से योगी खुशी से भर जाते है. कुंड़लिनी 6 शोधक क्रियाओंडड का लाभ प्रदान करती है.

    यह प्राण अपनों को क्रियाशील करती है जिससे आदमी अपने में समा जाता है. कुंड़लिनी से आदमी चार योग कर सकता है,

    अर्थात पुरुषार्थ-धर्मस्व अर्थात् काम, अर्थ, धर्म तथा मोक्ष. यह इंद्रियों को सुंतुलित करता है.

    दिमाग को एकाग्र करता है जिससे यह परमानन्द से भर जाता है. यह 6 चक्रोंडड को प्रभावित करता है.

    3 गाठों को खोलता है तथा 3 अशुध्दियों को धो देता है जिससे मानव की चेतना जिकुंटी से ऊपर उठ जाती है.

    कुंड़लिनी आपको 3 अवस्थाओं से ऊपर 5 आवरणों से आगे तथा 3 गुंणों से आगे चेतना के स्वाभाविक स्पन्दन तक ले जाती है.

    कुंड़लिनी के माध्यम से आप सहसरार में सहॉचचटड सूर्यो का अनुभव करते है. आपको अधिक चेतना आती है. यह इसका कार्य है.

    कुंड/लिनी में ओम के रुप में यह परमानन्द देती है. यह पुल्लिंग तथा स्त्रीलिंग दोनों होती है. यह योगिनी है. यह योग की देवी है .

    कुंडलिनी योगा की आग है, माया को खाने वाली, ज्ञान की संरक्षिका, पूर्ण देवी है. जो सभी आंतरिक कार्य करती है.

    जब कुंड़लिनी जागरुक होती है तो क्रियाए शुरु होती है. पाप और दुख नष्ट हो जाते है.

    जब आंतरिक, बाहरी क्रियाए राजा, हाथा, भक्ति और योग मंत्र की क्रियाए होती है तो जीवन खुशी से भर जाता है.

    जब आप इसके भीतर ईश्वरीय रोशनी को देखते है. दिव्य संगीत सुनते है, इसका मीठा और नमकीन रस पीते है तो जिंदगी मधुरस से भर जाती है.

    गुरु की कृपा से आप कुंड़लिनी के प्यारे उन्माद को जानते है, शिव शक्ति में खो जाते है तथा बल में प्रवेश करते है तथा स्वःसिध्दि के बारे में जानते है.

    कुंड़लिनी त्रिकुटी क चट तोड़ती है तथा सहसरार में जाती है. कुंड़लिनी, सार्वभौम माता, सभी योगों को कराती है, यह मंत्र का रुप तथा सार है.

    जब आप गुरु की कृपा से मंत्र प्राप्त करते है ते वह तेजी से जागरुक हो जाती है.

    मंत्र, गुरु, कुंड़लिनी तथा चिती सभी उसी भगवान परमात्मा की आनन्दित शक्ति है.

    जब कुंड़लिनी जागृत हो जाती है, तो चिती मूलधारा चक्र से ऊपर सहसरार की जाती है.

    शरीर के सभी 6 चक्रो को भेदती है. साधक किसी भी चक्र पर चिन्तन कर सकते है,

    लेकिन चिन्तन का बेहतर स्थान अग्निचक्र है जो शिव की तीसरी आँख भी कहा जाता है.

    निम्न सारणी विभिन्न चक्रों पर चिन्तन के प्रभाव और परिणाम दर्शाती है.

    साधक के जीवन में कुंड़लिनी को जागरुक करना मील का प्रत्थर है जो भगवान की प्रार्थना द्वारा हो सकता है.

    भगवान केवल प्यार, मन लगाकर काम करना/उपासना की आशा करता है किसी अन्य की नही.

    जब कुंड़लिनी जागरुक हो जाती है,तो मानव चेतना के उत्तेजित क्षण में उल्लास का अनुभव करता है,

    भैतिक शरीर जमीन/आसनो पर बैठ सकता है लेकिन सूक्ष्म शरीर स्वर्गीय संसार/ईश्वरीय लोको/परिमंडलों में हवा मे यात्रा कर सकता है .

  4. प्रसीद देवि प्राणदा !!

    ==============================

    या देवी सर्व भूतेषु चिती-रूपेण संस्थिता

    शक्तिरूपा शान्तिरूपा श्रद्धारूपा रूपातिता ,

    चेतना सर्व भूतानाम् विष्णुमायेति शब्दिता ,

    मुक्तिदाता तु या माता सा मातृचरणे नमः !!

    जगद्धात्री जगज्जननी जगत्संहारिणी शिवा

    त्रिगुण्मयी गुणातीता त्रिनेत्री सा गुणप्रदा !

    आद्यशक्ति महादेवी सिद्धिदा शुद्धबुद्धिदा

    आद्यन्तरहिता माता भक्ति भुक्ति च मुक्तिदा!!

    स्वयं ज्योतिस्वरूपा च ब्रह्मरूपा चिदंबरा

    જ્ઞાनप्रदा चिदानंदा सर्वसाक्षी ऋतंभरा ,

    जगन्माया जगद्वन्द्या, नमामि योगिनां प्रभाम् !

    करुणामयि ! नमस्तुभ्यम् ! प्रसीद देवि प्राणदा !!

    Thanks to Pragnaben Vyas
    http://niravrave.wordpress.com/2010/07/29/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a6-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%a6%e0%a4%be/

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