Do you hate someone? – प्रेम के अंकुरित होने पर मन के अंदर घृणा..

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Re: Do you hate someone?

प्रेम के अंकुरित होने पर मन के अंदर घृणा…

एक बार संत राबिया एक धार्मिक पुस्तक पढ़ रही थीं। पुस्तक में एक जगह लिखा था, शैतान से घृणा करो, प्रेम नहीं। राबिया ने वह लाइन काट दी। कुछ दिन बाद उससे मिलने एक संत आए। वह उस पुस्तक को पढ़ने लगे। उन्होंने कटा हुआ वाक्य देख कर सोचा कि किसी नासमझ ने उसे काटा होगा। उसे धर्म का ज्ञान नहीं होगा। उन्होंने राबिया को वह पंक्ति दिखा कर कहा, जिसने यह पंक्ति काटी है वह जरूर नास्तिक होगा।

राबिया ने कहा, इसे तो मैंने ही काटा है। संत ने अधीरता से कहा, तुम इतनी महान संत होकर यह कैसे कह सकती हो कि शैतान से घृणा मत करो। शैतान तो इंसान का दुश्मन होता है। इस पर राबिया ने कहा, पहले मैं भी यही सोचती थी कि शैतान से घृणा करो। लेकिन उस समय मैं प्रेम को समझ नहीं सकी थी। लेकिन जब से मैं प्रेम को समझी, तब से बड़ी मुश्किल में पड़ गई हूं कि घृणा किससे करूं। मेरी नजर में घृणा लायक कोई नहीं है।

संत ने पूछा, क्या तुम यह कहना चाहती हो कि जो हमसे घृणा करते हैं, हम उनसे प्रेम करें। राबिया बोली, प्रेम किया नहीं जाता। प्रेम तो मन के भीतर अपने आप अंकुरित होने वाली भावना है। प्रेम के अंकुरित होने पर मन के अंदर घृणा के लिए कोई जगह नहीं होगी। हम सबकी एक ही तकलीफ है। हम सोचते हैं कि हमसे कोई प्रेम नहीं करता। यह कोई नहीं सोचता कि प्रेम दूसरों से लेने की चीज नहीं है, यह देने की चीज है। हम प्रेम देते हैं। यदि शैतान से प्रेम करोगे तो वह भी प्रेम का हाथ बढ़ाएगा।

संत ने कहा, अब समझा, राबिया! तुमने उस पंक्ति को काट कर ठीक ही किया है। दरअसल हमारे ही मन के अंदर प्रेम करने का अहंकार भरा है। इसलिए हम प्रेम नहीं करते, प्रेम करने का नाटक करते हैं। यही कारण है कि संसार में नफरत और द्वेष फैलता नजर आता है।

From: H P Rathod
: Monday, July 25, 2011, 6:32 AM

Do u hate someone???

A kindergarten teacher has decided to let her class play a game. The teacher told each child in the class to bring along a plastic bag containing a few potatoes. Each potato will be given a name of a person that the child hates, so the number of potatoes that a child will put in his/her plastic bag will depend on the number of people he/she hates.

So when the day came, every child brought some potatoes with the name of the people he/she hated. Some had 2 potatoes; some 3 while some up to 5 potatoes. The teacher then told the children to carry with them the potatoes in the plastic bag wherever they go (even to the toilet) for 1 week.

Days after days passed by, and the children started to complain due to the unpleasant smell let out by the rotten potatoes. Besides, those having 5 potatoes also had to carry heavier bags. After 1 week, the children were relieved because the game had finally ended….

The teacher asked: “How did you feel while carrying the potatoes with you for 1 week?”. The children let out their frustrations and started complaining of the trouble that they had to go through having to carry the heavy and smelly potatoes wherever they go.

Then the teacher told them the hidden meaning behind the game. The teacher said: “This is exactly the situation when you carry your hatred for somebody inside your heart. The stench of hatred will contaminate your heart and you will carry it with you wherever you go. If you cannot tolerate the smell of rotten potatoes for just 1 week, can you imagine what is it like to have the stench of hatred in your heart for your lifetime???”

Moral of the story:
Throw away any hatred for anyone from your heart so that you will not carry sins for a lifetime. Forgiving others is the best attitude to take!

True love is not loving a perfect person but loving an imperfect person perfectly!!

About dhavalrajgeera

Physician who is providing free service to the needy since 1971. Rajendra M. Trivedi, M.D. who is Yoga East Medical Advisor www.yogaeast.net/index.htm http://www.yogaeast.net/index.htm Graduated in 1968 from B. J. Medical College, Amadavad, India. Post Graduate training in Neurological Surgery from Charles University in Czechoslovakia. 1969 - 71. and received Czechoslovakian Government Scholarship. Completed training at the Cambridge Hospital and Harvard University in Psychiatry. Rajendra M. trivedi is an Attending Psychiatrist at Baldpate Hospital. He is the Medical Director of CCA and Pain Center in Stoneham, MA where he has been serving the community since 1971 as a Physician. OTHER AFFILIATIONS: Lifer of APA - American Psychiatrist Association Senior Physician and Volunteer with Massachusetts Medical Society and a Deligate of the Middlesex District. www.massmed.org Patron member of AAPI - American Association of PHYSICIANS OF INDIA. LIFE MEMBER OF IMANE - Indian Medical Association of New England. Member of the Board of Advisors "SAHELI, Boston,MA. www.saheliboston.org/About1/A_Board Dr. Trivedi is working closely with the Perkin's School for the Blind. www.perkins.org. Dr. Trivedi is a Life member and Honorary Volunteer for the Fund Raising Contact for North America of BPA - Blind People Association of Amadavad, India. www.bpaindia.org Dr.Trivedi is the Medical Advisor for Yoga East since 1993. He is a Physician who started Health Screening and Consultation At Shri Dwarkami Clinic in Billerica, MA. https://www.dwarkamai.com/health-and-wellness

3 responses »

  1. शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब
    उसमें फिर मिलायी जाये, थोड़ी सी शराब
    होगा यूं नशा जो तैयार
    हाँ…
    होगा यूं नशा जो तैयार, वो प्यार है

    शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब
    उसमें फिर मिलायी जाये, थोड़ी सी शराब,
    होगा यूं नशा जो तैयार, वो प्यार है
    शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब

    हे हे हे हे हे …

    हंसता हुआ बचपन वो, बहका हुआ मौसम है
    छेड़ो तो इक शोला है, छूलो तो बस शबनम है
    हंसता हुआ बचपन वो, बहका हुआ मौसम है
    छेड़ो तो इक शोला है, छूलो तो बस शबनम है
    गाओं में, मेले में, राह में, अकेले में
    आता जो याद बार बार वो, प्यार है
    शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब
    उसमें फिर मिलायी जाये, थोड़ी सी शराब
    अरे, होगा यूं नशा जो तैयार, वो प्यार है
    शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब

    ओ… र र र र…
    रंग में पिघले सोना, अंग से यूं रस झलके
    जैसे बजे धुन कोई, रात में हलके हलके
    रंग में पिघले सोना, अंग से यूं रस झलके
    जैसे
    बजे धुन कोई, रात में हल्के हल्के
    धूप में, छाओं में, झूमती हवाओं में
    हर दम करे जो इन्तज़ार वो, प्यार है
    शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब
    उसमें फिर मिलायी जाये, थोड़ी सी शराब
    लता: ओ… होगा यूं नशा जो तैयार
    वो प्यार

    याद अगर वो आये
    हो …
    याद अगर वो आये, कैसे कटे तनहाई
    सूने शहर में जैसे, बजने लगे शहनाई
    याद अगर वो आये, कैसे कटे तनहाई
    सूने शहर में जैसे, बजने
    लगे शहनाई
    आना हो, जाना हो, कैसा भी ज़माना हो
    उतरे कभी ना जो खुमार वो, प्यार है

    शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब
    उसमें फिर मिलायी जाये, थोड़ी सी शराब
    अरे, होगा यूं नशा जो तैयार
    वो प्यार है

    शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब

    On Mon, 7/25/11, H P Rathod wrote:

    : Monday, July 25, 2011, 7:20 AM

    સવારમાં ઉઠીને આંખો ખોલતા પહેલા,
    કોઈનો ચહેરો જોવાની ઈચ્છા થાય,
    એ પ્રેમ છે…!

    મંદિરમાં દર્શન કરતી વખતે,
    કોઈ પાસે ઊભુ છે તેવો આભાસ થાય,
    એ પ્રેમ છે…!

    આખા દિવસનો થાક,
    જેની સાથે બેસવાની કલ્પના માત્રથી દૂર થઈ જાય, એ પ્રેમ છે…!

    માથું કોઈના ખોળામાં મૂકીને,
    લાગે કે મન હળવું થઈ ગયું,
    એ પ્રેમ છે…!

    લાખ પ્રયત્નો છતાં,
    જેને નફરત ના કરી શકો,ભૂલી ના શકો,
    એ પ્રેમ છે…!

    આ વાંચતી વખતે,
    જેનો ચહેરો આપની સામે તરવરે,
    એ તમારો પ્રેમ…..છે…!

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