सीता-वनवास का खंडन…………….

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||श्री सीताराम ||
||श्रीमद जानकीवल्लभो विजयतेतराम||

Refutation of the story of Sita-Vanvas

महाराजकुमार मर्यादापुरुषोत्तम श्री राघवेन्द्र सरकार श्री राम ने परम सुशीला परमपवित्र अखंड पतिव्रता जनकनन्दिनी श्री सीता जी का कभी परित्याग नहीं किया.. उन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने अपनी प्रियतमा को कभी भी वनवास नहीं दिया, इसे सिद्ध करने के लिए मैं कुछ प्रमाण दे रहा हूँ |

सीतावनवास का खंडन


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इस घटना का वर्णन कभी भी महाभारत में नही आया है ..जबकि महाभारत में हनुमान जी ने भीम को रामायण की कथा सुनायी और मार्कण्डेय जी ने युद्धिष्ठर को रामोपाख्यान (रामायण) सुनाया पर उसमे सीता त्याग का कहीं कोई वर्णन नहीं है | महाभारत जैसे इतिहास में वर्णित रामकथा में कहीं भी सीतावनवास नही है | भला इतनी महत्वपूर्ण घटना का वर्णन हनुमान जी और ऋषि मार्कण्डेय करना क्यूँ भूल गए ? सीतात्याग का संकेत मात्र भी देना भूल गए ? ऐसा इसलिए क्यूंकि भगवान श्री राम ने माता सीता का कभी त्याग किया हीं नहीं |

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श्रीमद भागवत में जो रामायण कि कथा मे सीतात्याग का वर्णन है वो प्रक्षिप्त है क्यूंकि पहले लिखा गया है भगवान ने सीता का त्याग कर वन भेज दिया और उसके बाद लिखा गया है कि भगवान सीता जी के साथ महल में विहार करते हैं |

तस्मिन् भगवान् राम: स्निग्ध्या प्रिययेष्टया |
रेमे स्वारामधीराणामृषभ: सीतया किल ||
बुभुजे यथाकालम् कामान् धर्ममपीडयन |
वर्षपुगान बहून नृणामभिध्याताङघ्रिपल्लव: || [श्रीमद्भागवत .११.३४३५]

हे परीक्षित ! भगवान श्री राम जी आत्माराम जितेन्द्रिय पुरुषों के शिरोमणि थे, [लंका से अयोध्या आने के उपरान्त दीर्घ काल पर्यंत तक ] वे अपने महल में अपनी प्रानप्रिया प्रेममयी भार्या श्री सीता जी के साथ विहार किया करते थे | नगर के सभी स्त्रीपुरुष भगवान श्री राम के चरणों का ध्यान करते रहते हैं और इस तरह भगवान श्री राम ने बहुत कालपर्यंत तक धर्म कि मर्यादा का पालन करते हुए भोगो का उपभोग करते हुए राज्य किया |

यहाँ पे श्रीमद्भागवत में साफ़साफ़ लिखा है कि प्रभु सीता जी के साथ महल में रहा करते थे और इस तरह बहुत कालपर्यंत तक भोगो का उपभोग करते हुए धर्म का राज्य स्थापित किया, फेर सीतात्याग , सीता वनवास , शम्बूकवध कि बाते केवल और केवल मर्यादापुरुषोत्तम के दिव्य चरित्र कों कलंकित करने के लिए यत्रतत्र जोड़ दिया गया है , जो उनके चरित्र से कभीं भी मेल नहीं खाती है | भगवान श्री राम सीता बिन रोतेरोते फिरते थे, तो भला महल में सीता बिना कैसे भोगो का उपभोग कर सकते हैं ? अतः सीतावनवास की कथा झूठी है, और सिर्फ श्री राम जी के चरित्र को कलंकित करने के लिए ऊपर से कहींकहीं पुराणों में जोड़ दी गयी है |

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रामभक्तों में अग्रणी गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में कहीं भी सीतात्याग या सीतानिर्वासन का वर्णन नहीं किया है अतः सीतात्याग को कभी गोस्वामी जी ने सत्य नहीं माना है, उनके किसी अन्य ग्रन्थ में भी सीतात्याग का वर्णन नहीं है |

यहाँ तक कि गोस्वामी तुलसीदास ने माँ सीता को सदैव अनिंदित बताया है, और पुरवासियों का श्री राम और सीता में सतत प्रेम अनुराग था तो सीता की पवित्रता को लेकर पुरवासियों में अपवाद फैलने वाली बात कल्पित हीं है

कौसल्यादि सासु गृह माहीं। सेवइ सबन्हि मान मद नाहीं॥
उमा रमा ब्रह्मादि बंदिता। जगदंबा संततमनिंदिता॥ [रामचरितमानस, उत्तरकांड, २४.]

भावार्थ:- घर में कौसल्या आदि सभी सासुओं की सीताजी सेवा करती हैं, उन्हें किसी बात का अभिमान और मद नहीं है॥(शिवजी कहते हैं-) हे उमा जगज्जननी रमा (सीताजी) ब्रह्मा आदि देवताओं से वंदित और सदा अनिंदित (अर्थात उनकी निंदा कभी नहीं हुई) हैं॥

अतः सीता जी सदा महल में हीं अपनी सासुओं कि सेवा करते हुए सदा अनिंदित रही, उनकी निंदा कभी नहीं हुई |

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सीतानिर्वासन के बारे में नारद जी ने आदिकवि वाल्मीकि को मूल रामायण सुनाते समय कोई संकेत नहीं दिया, नारद जी ने ये तो कहा कि भगवान ११००० वर्षों तक राज्य करके ब्रह्मलोक (ब्रह्मपूरी साकेतलोक) को प्रस्थान करेंगे (भविष्य में ), नगर में सभी लोग प्रमुदित रहेंगे, कोई कष्ट नहीं होगा किसी को, रामराज्य का वर्णन भी किया, रामचंद्र विभिन्न यज्ञ करेंगे, पर कहीं भी सीतात्याग का जिक्र तक नहीं किया | अतः इससे भी सिद्ध होता है कि सीतानिर्वासन की घटना कल्पित हीं है |

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सीतानिर्वासन खंडन के लिए अकाट्य प्रमाण स्वयं श्री वाल्मीकि रामायण में हीं विद्यमान है | भगवान श्री राम स्वयं वाल्मीकि रामायण में अग्निदेव को वचन देते हैं :-

अनन्या हि मया सीता भास्करेण प्रभा यथा ||
विशुद्धा त्रिषु लोकेषु मैथिली जनकात्मजा |
विहातुं मया शक्या कीर्तिरात्मवता यथा || [वा o रा o .११८.१९२०]

श्री राम अग्नि देव से कहते हैं : सीता मुझसे (राम से) अभिन्न हैं जैसे सूर्य से उसकी प्रभा अभिन्न होती है, अर्थात सीता और राम सदैव एक हीं हैं | जनकदुलारी मैथिली सीता तीनों लोकों में परम शुद्ध है और मुझसे ऐसी परम शुद्ध देवी का त्याग कभी नही हो सकता जैसे विवेकी आत्मवान पुरुषों द्वारा कीर्ति का त्याग संभव नहीं है |

जब स्वयं श्री राम हीं युद्धकाण्ड में सीतात्याग की किसी भी संभावना का खंडन करदेते हैं तो सीतात्याग का कोई भी प्रश्न हीं नहीं उठता हैसीता और राम अभिन्न हैं ..सदा एक थे, एक हैं और एक हीं रहेंगे |

अतः सीतात्याग या सीतानिर्वासन कभी हुआ हीं नही |

प्रभु श्री सीताराम के चरणों में समर्पित

सीतारामकिंकर

रवि शंकर

||सीताराम सीताराम – SitaRama SitaRama||

 

 
 

About dhavalrajgeera

Physician who is providing free service to the needy since 1971. Rajendra M. Trivedi, M.D. who is Yoga East Medical Advisor www.yogaeast.net/index.htm http://www.yogaeast.net/index.htm Graduated in 1968 from B. J. Medical College, Amadavad, India. Post Graduate training in Neurological Surgery from Charles University in Czechoslovakia. 1969 - 71. and received Czechoslovakian Government Scholarship. Completed training at the Cambridge Hospital and Harvard University in Psychiatry. Rajendra M. trivedi is an Attending Psychiatrist at Baldpate Hospital. He is the Medical Director of CCA and Pain Center in Stoneham, MA where he has been serving the community since 1971 as a Physician. OTHER AFFILIATIONS: Lifer of APA - American Psychiatrist Association Senior Physician and Volunteer with Massachusetts Medical Society and a Deligate of the Middlesex District. www.massmed.org Patron member of AAPI - American Association of PHYSICIANS OF INDIA. LIFE MEMBER OF IMANE - Indian Medical Association of New England. Member of the Board of Advisors "SAHELI, Boston,MA. www.saheliboston.org/About1/A_Board Dr. Trivedi is working closely with the Perkin's School for the Blind. www.perkins.org. Dr. Trivedi is a Life member and Honorary Volunteer for the Fund Raising Contact for North America of BPA - Blind People Association of Amadavad, India. www.bpaindia.org Dr.Trivedi is the Medical Advisor for Yoga East since 1993. He is a Physician who started Health Screening and Consultation At Shri Dwarkami Clinic in Billerica, MA. https://www.dwarkamai.com/health-and-wellness

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